पटाखों में बेरियम कंपाउंड होता है जिससे उनका रंग हरा होता है. पारंपरिक पटाखे काले पाउडर, क्लोरेट्स और परक्लोरेट्स से बने होते हैं। सामान्य पटाखे 160 डेसीबल तक शोर करते हैं, वहीं ग्रीन पटाखों की. कैसे सामान्य पटाखों से हैं अलग:
Fractals PPT
ग्रीन पटाखे और पारंपरिक पटाखे, दोनों ही प्रदूषण फैलाते हैं. ग्रीन पटाखों में एलुमिनियम, सल्फर और पोटेशियम नाइट्रेट जैसे हानिकारक केमिकल्स कम या फिर बिल्कुल नहीं होते हैं। इसके साथ ही इसमें. हरित पटाखों को 'पर्यावरण के अनुकूल' पटाखे कहा जाता है और पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम वायु और ध्वनि प्रदूषण पैदा करने के लिये.
ये बेरियम कंपाउंड एक मेटल ऑक्साइड है जो वायु और ध्वनि प्रदूषण में योगदान.
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर को घटाने हेतु सभी प्रकार के पटाखों के उत्पादन, भण्डारण, विक्रय तथा प्रयोग को रोकने का निर्णय. आमतौर पर पारंपरिक पटाखों में तेज रोशनी, ज़ोरदार आवाज़ और आकर्षक रंगत के लिए कई खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता.